छोटी सी सोच

आज जब बच्चों को यह कहानी सुनाई तो विचार आया कि क्यों ना हम भी इस कहानी को पुनः पढ़ें और इसके मूल्यों को समझें जो आधुनिकता के मायाजाल में कहिं भूला दिये गए।

बचपन में हम सबने एक कहानी पढ़ी और सुनी भी थी। एक किसान था और उसके चार बेटे थे। जिनमें अक्सर झगड़े होते रहते थे। किसान बूढ़ा हो चला, और उसका अंत समय आ गया तो उसने अपने बच्चों को एक शिक्षा देना चाही।

एक दिन उसने अपने चारों बेटों को बुलाया और उन चारों को एक- एक लकड़ी देकर उसे तोड़ने को कहा। चारों बेटों ने लकड़ी को आसानी से तोड़ दिया। उसके बाद उसने चारों से टूटी लकड़ियां ली और उन लकड़ियों का एक गट्ठा बना कर हरएक लड़के से उस गट्ठे को तोड़ने कहा, परंतु अब कोई भी उस गट्ठे को तोड़ नहीं सका। यह देखकर किसान ने बेटों से कहा। जब तुम लोगों को मैंने एक एक लकड़ी दी तो तुम लोगों ने उसे आसानी से तोड़ दिया, पर जब उन्हीं लकड़ियों को एक साथ रखकर तोड़ने कहा तो तुम में से कोई भी उस गट्ठे को तोड़ नहीं सका।

इसी प्रकार जब तुम चारों अलग-अलग रहोगे और झगड़ा करते रहोगे तो कोई भी आपको तोड़ सकता है परन्तु जब तुम सभी इकट्ठे रहोगे तो तुम्हे कोई तोड़ नहीं पाएगा और सफलता पाओगे।
उस बूढ़े किसान की दी सीख उसके बेटों को समझ आई और सब खुशी-खुशी एक साथ रहने लगे।

कहानी का सार है कि हमारी एक छोटी सी सोच हमारा जीवन बदल सकती है और अच्छी सोच और उसका अनुसरण करनें से
बड़ी-बड़ी बाधाएं भी दूर की जा सकती हैं। आधुनिकता के इस दौर में वर्तमान जहां हर कोई एक दूसरे से जलन, ईर्ष्या व लड़ने-झगड़ने में लगा है वहां हमें इस छोटी सी कहानी से प्रेरणा लेनी चाहिए और जीवनपर्यन्त उस पर अमल कर स्वयं, अपने परिवार को व देश को सुरक्षित कर उसे आगे बढ़ने में अपना अमूल्य योगदान देना चाहिए।।🙏

मेरी ✒️ से

इष्ट देव…

आइए, पहले अपने इष्ट देव के बारे में कुछ जानें। परिवार के बच्चों को इष्ट देव शब्द सर्वप्रथम परिवार के बड़े- बूढ़ों से ही ही सुनने को मिलता है। जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते चले जाते हैं। समस्याएं उन्हें घेरने लगती हैं। तब वह इस शब्द की जांच पड़ताल करने लगते हैं।
इष्ट का अर्थ होता है, जो हमें बहुत प्यारा हो। जो हमारी इच्छा के बिल्कुल अनुरूप हो। हम जिन गुणों को अच्छा मानते हैं, वह सब उनमें हो और देवता का अर्थ होता है, जो देता है। बिना किसी प्रकार के शुल्क के आपको वह सब देता है। जो आपको जीवन यापन के लिए चाहिए। भारत हो या विश्व अलग अलग जाति और समुदाय के देवता होते हैं। जिन्हें इच्छा पूर्ति करने वाला जानकर उनकी पूजा आराधना अपने-अपने ढंग से की जाती है।

2. आइए जानें इष्ट देव कौन होते हैं।

वैसे तो शास्त्रों और ज्योतिषियों के अनुसार, जो आपकी जन्म कुंडली के देवता हैं वही आपके इष्ट देव हैं।
परंतु मेरे विचार में, जो हमारे मन में , हमारे विचारों में निरंतर वास करते हैं। जब हम किसी संकट में होते हैं तब जो हमारे मन में सर्वप्रथम आते हैं। हमारी खुशियों में हम जिन्हें सर्वप्रथम याद करते हैं ताकि हम उन्हें धन्यवाद प्रेषित कर पाएं और जिनके साथ अपनी खुशी साझा करते हैं। जिनके चरणों में मन अनायास ही पहुंच जाता है।
वास्तव में वे ही हमारे इष्ट देव हैं। जिन्हें हम हमारे हर सुख-दुःख, हर परिस्थिति में याद करते हैं जिनके लिए हमारे मन में हमेशा यही विचार रहता है कि प्रभु मैं आपको कभी भूलूं नहीं।उदाहरण के लिए – यदि आप भगवान शिव की उपासना करते हैं और कोई आपसे आपकी कुंडली के मुताबिक, तथा अन्य कारणों से भगवान विष्णु को अपना इष्ट देव मान उनकी उपासना को कहे। तो वह आप नहीं कर पाएंगे, क्योंकि आपका मन अथवा आपका तारतम्य ही उनके साथ नहीं जुड़ पाएगा।

3. कोई भी ज्ञान आराध्य पूजा और उनकी कृपा के बिना अधूरा है?

आप को अपने भीतर से ही खुद का एवम् अपने आराध्य का विकास करना होता है। कोई भी ज्ञान बिना आराध्यदेव की कृपा से आपको कुछ सिखा नहीं सकता। कोई भी शक्ति आपको बिना अपने आराध्य देव की कृपा के आध्यात्मिक एवम् धनवान नहीं बना सकती।
आपको सिखाने वाली और प्रगति की राह पर ले जाने वाली शक्ति और कोई नहीं सिर्फ आपकी आत्मा एवम् उस आत्मा में बसने वाले हमारे आराध्य( इष्ट ) देव ही हैं।

4. निष्कर्ष…

वास्तव में ईश्वर एक ही है। बस उनके रूप अलग अलग हैं। फिर आपका मन उनके जिस भी रूप में लगे। आपको उन्हीं को अपना इष्ट देव मान कर उनकी आराधना करनी चाहिए।
यहां हमें एक बात और समझ लेनी चाहिए कि हमें उनकी आराधना ना सिर्फ इसलिए करनी चाहिए कि वे हमारी समस्त इक्छाएं पूरी करते हैं या करेंगे। बल्कि हमें चाहिए कि हम उनकी आराधना निः स्वार्थ भी करें।उनके द्वारा हमें जो जीवन प्रदान किया गया है उसके लिए भी हमें निरंतर उन्हें धन्यवाद देना चाहिए। मेरे विचार में जब आप अपना सर्वस्व उन्हें निछावर कर, स्वयं को भी उन्हीं के चरणों में सौंप दोगे। तो निःसंदेह आप जीवन भर के लिए तमाम चिंताओं से मुक्त हो जाओगे और आपका मन कभी घबराएगा नहीं। मैं तो इतनी ही प्रार्थना मेरे भोलेनाथ से करना चाहती हूं कि मेरा मन निः स्वार्थ आपके चरण कमलों में लगा रहे और हे परमपिता परमेश्वर मैं आपको कभी भूलूं नहीं।

मेरे बारे में…

ये मेरा पहला ब्लॉग है। जिसमें मैं आपको अपने बारे में जानकारी देना चाहती हूं, जिससे आप सभी को मुझे समझने का अवसर प्राप्त हो।

मेरा नाम प्रिया शर्मा है। मेरा जन्म 11 मई 1994 को, भारत का हृदय कहे जाने वाले मध्यप्रदेश के ग्वालियर (गोहद) में हुआ। मेरी प्रारंभिक पढ़ाई भी यहीं पूरी हुई एवं जीवाजी विश्वविद्यालय से मैंने कॉमर्स के क्षेत्र में स्नातक और कला के क्षेत्र में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की। मैं आज भी अपने माता पिता और परिवार के साथ ही रहती हूं।

लेखन का कारण एवम् उद्देश्य…

वर्डप्रेस जैसे ऐप पर अपना लेखन कार्य पूर्ण स्वतंत्रता से करना चाहती हूं।

जिसमें मैं मेरे अथवा हमारे जीवन में और जीवन के चारों ओर घटित होने वाली घटनाओं एवम् उनसे मिलने वाली शिक्षा को, अपने स्वतंत्र विचारों और अनुभवों को आप सभी के साथ साझा करना चाहती हूं।।